12 वीं की छात्रा इशिता राय बनी ओडिशी की स्टार नृत्यांगना

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रांची। राजधानी के एचईसी परिसर स्थित सेक्टर दो, आवास संख्या ए/118 निवासी छात्रा इशिता रॉय ने। ओडिशी शास्त्रीय नृत्य कला के क्षेत्र में इशिता काफी कम उम्र में ही लोकप्रियता हासिल करने में सफल रही है। वह ओडिशी शास्त्रीय नृत्य कला की शिक्षा कुसई कॉलोनी, डोरंडा स्थित नृत्य ग्राम( स्कूल ऑफ ओडिशी डांस) की निर्देशिका सविता मिश्रा से विगत 10 वर्षों से प्राप्त कर रही है। श्रीमती मिश्रा पद्म विभूषण स्वर्गीय गुरु श्री केलुचरण महापात्रा जी की शिष्या हैं।
सुश्री इशिता वर्तमान में जवाहर विद्या मंदिर में 12 वीं की छात्रा है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा एलकेजी से छठवीं तक सेक्रेड हार्ट स्कूल में हुई। तत्पश्चात सातवीं से दसवीं तक की शिक्षा विवेकानंद विद्या मंदिर से प्राप्त किया।
इशिता के पिता श्यामल कुमार रॉय विवेकानंद विद्या मंदिर, धुर्वा में संगीत के शिक्षक हैं। उनकी माता वासना रॉय एक कुशल गृहिणी व हस्तशिल्पी हैं।
इशिता 13 वर्ष की आयु से ही विभिन्न कार्यक्रमों में अपने नृत्य एवं गायन प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही है। झारखंड सरकार द्वारा आयोजित अनेक कार्यक्रमों में एकल एवं समूह में इशिता अपनी प्रस्तुति दे चुकी है। वर्ष 2016 एवं 2018 में सांस्कृतिक संस्था द्वारा भुवनेश्वर में आयोजित ओडिशी इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में इशिता ने अपनी नृत्य कला के प्रदर्शन से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर खूब वाहवाही बटोरी। वर्ष 2017 में ओडिशा सरकार द्वारा आयोजित इंटरनेशनल ओडिशी डांस फेस्टिवल में समूह में इशिता ने प्रस्तुति दी। इस वर्ष भुवनेश्वर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में अपनी प्रस्तुति से इशिता ने सबों का मन मोह लिया।
इशिता को भारत सरकार के सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग द्वारा वर्ष 2015-2016 से छात्रवृत्ति दी जा रही है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 15 दिवसीय कार्यशाला 22 सितंबर से 4अक्टूबर 2018 राजघाट, नई दिल्ली में भाग लेने का अवसर भी इशिता को मिला।
इशिता अपना आदर्श और प्रेरणास्रोत अपने संगीत साधक पिता व नृत्य कला में पारंगत सविता मिश्रा को मानती हैं।
इशिता कहती हैं कि अपने परिवार में इस प्रकार का माहौल मिला,जिसके फलस्वरूप बचपन से ही नृत्य एवं संगीत के प्रति उसकी रुचि रही है। नृत्य कला एवं संगीत के क्षेत्र में इशिता की प्रतिभा और उसकी उपलब्धियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वह आने वाले समय में रांची ही नहीं, बल्कि झारखंड का का नाम रौशन करेगी।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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