कर्मयोगी जननेता और मजदूरों के मसीहा राजेन्द्र सिंह हमेशा याद आएंगे : सुबोधकांत सहाय

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रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा है कि कर्मयोगी जननेता राजेन्द्र सिंह का असमय दुनिया से विदा हो जाना देश व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। स्व.सिंह काफी लंबे समय तक राजनीतिक हमसफर के रूप में साथ रहे। संसदीय राजनीति और मजदूर आंदोलन के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान अविस्मरणीय रहेगा। मजदूरों के मसीहा के रूप में उनकी पहचान हमेशा बनी रहेगी। श्री सहाय ने कहा कि विशेष तौर पर झारखंड ने एक प्रखर राजनेता और मजदूरों का सच्चा साथी खो दिया है। इसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। उन्होंने स्व.सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। श्री सहाय ने कहा कि वे तीन दशकों से कोयलांचल की श्रमिक और सत्ता की राजनीति की धुरी बने रहे थे। तीन वर्ष पूर्व उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था जिसमें वे स्वस्थ होकर वापस लौट आए थे। 3 मई को जब फेफड़ों के संक्रमण के कारण गंभीर हालत में उन्हें एयर लिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया तो उम्मीद थी कि इसबार भी वे स्वस्थ होकर लौट आएंगे। श्री सहाय के मुताबिक वे लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे थे लेकिन जब उनके निधन की खबर मिली तो यह उनके लिए यह बड़ा झटका था। उन्होंने स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना उनके परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
राजेन्द्र सिंह के निधन पर कांग्रेस नेता दीपक लाल, सुनील सहाय, शैलेन्द्र सिंह, राजकिशोर प्रसाद, शशिभूषण राय,दीपक प्रसाद, आदित्य विक्रम जायसवाल, रणविजय सिंह, अशोक सिन्हा (प्रेसिडेंट),अमरजीत कुमार, इंद्रजीत सिंह, प्रकाश कुमार सिंह(चटनी) ने भी शोक व्यक्त किया।

 

 

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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