केंद्र में मोदी सरकार, तो भाजपा सांसद को डरने की क्या दरकार

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने फर्जी डिग्री कांड में दलील दी है कि वीरेंद्र कुमार मंडल नामक जिस आरटीआई एक्टिविस्ट के हवाले से दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकेल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के डीन के पत्र को सबूत के तार पर उद्धृत किया जा रहा है उन्होंने ऐसी की सूचना मांगी ही नहीं थी। सांसद महोदय ने उनकी अस्वीकृति का जुगाड़ कर लिया है। लेकिन यह तो पूरी तरह दस्तावेज़ी मामला है। अगर सांसद महोदय का दावा सही है। आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेंद्र कुमार मंडल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ऐसी की सूचना नहीं मांगी थी तो इसका अर्थ है कि दिल्ली विश्वविद्यालय का जो पत्र वायरल हो रहा है, वह फर्जी है। उनका पत्रांक मनगढ़ंत हैं। डीन का हस्ताक्षर भी जाली है। यदि ऐसा है तो बहुत गंभीर मामला है। जघन्य अपराध है। गोड्डा के तीन बार के विजयी सम्मानित सांसद की डिग्री को फर्जी बताने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया है। सासंद महोदय को तत्काल इस पत्र को अदालत में चुनौती देनी चाहिए और अपनी असली डिग्री की छाया प्रति को सार्वजनिक करना चाहिए। केंद्र में जिसकी पार्टी की सरकार है उसके सांसद के खिलाफ कोई ऐसी हिमाकत कर कैसे सकता है।

झारखंड में सत्तासीन झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सह प्रवक्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्र की प्रतिलिपि के साथ जांच और कार्रवाई का अनुरोध किया है और प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी मीडिया को दी है। दिलचस्प बात यह है कि दुबे जी ने इसके जवाब में अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई नहीं दी है बल्कि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई पुराना मामला उठा दिया है। उस मामले की सच्चाई क्या है यह जांच के बाद सामने आएगा लेकिन इससे वे फर्जी डिग्री के आरोप से बरी कैसे हो जाएंगे। 10 वर्ष की उम्र में उनके हाई स्कूल पास करने की बात पर पर्दा कैसे पड़ जाएगा। झारखंड के सबसे साफ सुथरी छवि के माने जाने वाले नेता पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का कहना है कि निशिकांत दुबे को अकारण परेशान किया जा रहा है। भाजपा में वापस लौटने के बाद अपनी पार्टी के सांसद का बचाव करना उनका फर्ज बनता है लेकिन इसका कोई आधार तो होना चाहिए। डिग्री सही है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। दिल्ली विश्वविद्यालय ने उसे जारी किया है तो कोई उसे फर्जी कैसे करार दे सकता है।

लोगों का कहना है कि सांसद बनने से पहले निशिकांत जी साइकिल पर घूमते थे। आज लग्जरी गाड़ियों पर चलते हैं। यह करिश्मा कैसे हुआ जांच तो इस बात की भी होनी चाहिए। पारदर्शिता का तकाजा है कि इस बात की जांच हो कि सांसद बनने के पहले इनके पास कितनी संपत्ति थी और अपने 15 वर्षों के सांसदकाल में उन्होंने कितनी संपत्ति अर्जित की। बात को साफ करने के ले यह अनुकूल अवसर है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की प्रचंड बहुमत की मजबूत सरकार है और तमाम संस्थाएं उसके रिमोट से चलती हैं। सरकार में भी अपने दल के लोगों के सात खून माफ कर देने और उन्हें हर संकट से निकाल लाने की परंपरा है। किसी एजेंसी से जांच कराकर एनओसी प्राप्त किया जा सकता है। फर्जी डिग्री कोई गंभीर मामला नहीं है। इस सरकार में फर्जी डिग्री के आरोप तो शीर्ष नेताओं पर भी हैं। किसकी हिम्मत है कि इसकी जांच करा ले। लिहाजा सांसद निशिकांत दुबे जी को निश्चिंत रहना चाहिए कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। कम से कम इस सरकार के कार्यकाल में तो नहीं। केंद्र अपना है तो राज्य सरकार क्या बिगाड़ लेगी।

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