शिव के त्रिशूल पर सांसद निशिकांत का देवघर

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

लोग कहते हैं कि वाराणसी शिव के त्रिशूल पर बसा हुआ है। लेकिन लगता है कि इस कहावत के रचयिता ने झारखंड को नहीं देखा। अन्यथा वे अपना विचार बदल देते। वाराणसी तो अपनी जगह पर कायम हैं। वहां असामान्य घटनाएं सुनने में नहीं आतीं। झारखंड में ज्यादा असामान्य ही होता है। सामान्य घटनाएं कभी-कभार प्रकाश में आती हैं। अभी गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का जो कारनामा सामने आया है वह हैरत में डालने वाला है। देश के किसी हिस्से में संभव नहीं है। नियम-कानून की जिस तरह धज्जियां उन्होंने उड़ाई हैं उसके लिए सचमुच 56 इंच का सीना चाहिए। वह भी तब जब झारखंड में उनकी पार्टी की सरकार नहीं है। देवघर के तिवारी चौक के पास एलओकेसी की जिस ज़मीन की उन्होंने रजिस्ट्री 29 अगस्त 2019 को अपनी पत्नी अनामिका गौतम के नाम निबंधन संख्या 770 के तहत कराई है उसका सरकारी मूल्य 19,49,16000 है लेकिन उन्होंने इसकी कीमत मात्र 3 करोड़ तय करा दी है। उन्हीं की पार्टी की मोदी सरकार ने नियम बनाया है कि ज़मीन का मूल्य चेक, ड्राफ्ट अथवा ऑनलाइन भुगतान के जरिए करना है और नकद रकम 10,000 से ज्यादा नहीं अदा की जा सकती लेकिन अपनी पार्टी की सरकार का बनाया नियम उनपर तो लागू नहीं होता। उन्होंने पूरी रकम की अदायगी नकद की। पीएम मोदी कैशलेश इकोनामी के पक्षधर रहे हैं। काले धन के सफाए का नारा देकर सत्ता में आए। नवंबर 2016 में काले धन के खात्मे के लिए नोटबंदी की जो पूरी तरह विफल रही। उन्हें क्या पता था कि उनकी पार्टी के साधारण सांसद भी अपने घरों में करोड़ों रुपये नकद रखते हैं। बैंक भी इतनी बड़ी रकम की नकद लेन-देन को हतोत्साहित करते हैं। लेकिन नाम ही निशिकांत है तो रात की कालिमा में चमक पैदा करना आदत में शुमार रहा है। इतनी नकद रकम का स्रोत क्या है यह उनसे भला कौन पूछ सकता है। ईडी, इनकम टैक्स आदि विभाग भाजपा सांसदों के लिए तो हैं नहीं। विपक्षियों के लिए हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास पूरा मामला दस्तावेज़ समेत पहुंच चुका है। मीडिया में भी मामला  आ चुका है। निशिकांत दुबे सीएम सोरेन पर कई बार गलत तरीके से ज़मीन खरीद का आरोप लगा चुके हैं। अब खुद उनकी पोल पट्टी खुल चुकी है। हेमंत सोरेन उनके खिलाफ क्या कार्रवी करेंगे, किस एजेंसी से जांच कराएंगे और केंद्र सरकार अपने सांसद के बचाव के लिए अपनी शक्तियों का किस रूप में उपयोग करेगी कहना कठिन है। जो भी हो मामला दिलचस्प है। बाबा नगरी देवघर निशिकांत दुबे के ही संसदीय क्षेत्र में आता है। संभव है शिव का त्रिशूल वाराणसी की जगह देवघर को टिकाए रखने के निमित्त वहां की ज़मीन के नीचे अवस्थित हो। मोदी है तो सबकुछ मुमकिन है।

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