सतर्कता बरतने से कोरोना से बचाव संभव : तुषार कांति शीट

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रांची। झारखंड में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में हमें विशेष रूप से सतर्कता बरतना जरूरी है। इस संबंध में जागरूकता भी काफी हद तक संक्रमण रोकने में सहायक होगी। उक्त बातें शहर के जाने-माने समाजसेवी और सामाजिक संस्था श्रीरामकृष्ण सेवा संघ के सहायक सचिव तुषार कांत शीट ने कही। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 (कोरोना) से बचाव के लिए सरकारी मशीनरी को भी चुस्त-दुरुस्त करना जरूरी है। इसकी रोकथाम के लिए समुदाय स्तर पर सतर्कता और जागरूकता जरूरी है। वहीं, सरकारी स्तर पर भी पर्याप्त उपाय किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिए जाने के बाद रिपोर्ट आने में दो हफ्ते का समय लग रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने की स्थिति बेहद लचर है। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए सरकार की व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें मिल रही है कि सैंपल देने के बाद कई दिन बीतने के बावजूद उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। जांच की रफ्तार और प्रक्रिया सुस्त होने की वजह से कोरोना संक्रमण पर काबू पाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। यह बेहद चिंतनीय है। श्री शीट ने कहा कि सरकार की व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है। तभी कोरोना के बढ़ते पर प्रकोप पर काबू पाने में हम सफल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। जांच रिपोर्ट मिलने में हो रहे विलंब से लोगों के समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न हो रही है। राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए सैंपल की रिपोर्ट 15 दिनों में भी नहीं आती है। ऐसे में राज्य के अन्य जिलों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट देने में लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए इस बदहाल व्यवस्था को सुधारना अत्यंत आवश्यक है। तभी हम कोरोना के बढ़ते संक्रमण पर काबू पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी ने मानव जीवन की लय को छिन्न-भिन्न करके रख दिया है। संपूर्ण विश्व में मानव समुदाय के लिए यह गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे समय हमें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। सावधानी और जागरूकता से भी हम इस वैश्विक आपदा से निजात पा सकते हैं। उन्होंने लोगों से कोरोना से बचाव के मद्देनजर सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत- प्रतिशत अनुपालन करने की अपील की है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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2 Comments
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