शिव शिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन की संगोष्ठी आयोजित

स्वच्छ वातावरण में ही सुन्दर जीवन : हरीन्द्रानंद

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रांची। शिव शिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन के तत्वावधान में स्वच्छ भारत, सुंदर भारत विषयक संगोष्ठी का आयोजन रविवार को धुर्वा के शाखा मैदान में किया गया। इस अवसर पर कालखंड के प्रथम शिव शिष्य हरीन्द्रानंद ने कहा कि स्वच्छ वातावरण में ही सुंदर जीवन पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एक मानसिकता है,एक काम को करने की शैली है। लोगों को संबोधित करते हुए वरेण्य गुरुभ्राता ने कहा कि हमें इस मनःस्थिति में आने की आवश्यकता है, तभी समाज तरक्की करेगा औऱ एक नए राष्ट्र का निर्माण संभव है। वैसे इस ब्रह्मांड में जगत गुरु शिव की इच्छा ही सर्वाेपरि है। उनकी दया के बिना कुछ भी संभव नहीं है इसलिये आप शिव के शिष्य के रूप में लगे रहिये,जगे रहिये। हमारी संस्कृति ने संसार को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया है, इसे फिर से सीखने की जरूरत है, आत्मसात करने की आवश्यकता है।
इस संगोष्ठी में हरीन्द्रानंद के जीवन पर केंद्रित पुस्तक ‘‘अनमिल आखर’’-हरीन्द्रानंद एक आध्यात्मिक अनावरण का लोकार्पण किया गया। यह किताब उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं को उजागर करती है। किताब पर प्रकाश डालते हुए लेखिका अनुनीता ने कहा कि इस पुस्तक को लिखा नहीं गया है, अपितु किसी ने कलम पकड़ा दी और पुस्तक का रूप मिल गया। उन्होंने कहा कि साहब और दीदी नीलम के जीवन को पन्नों में समेटा नहीं जा सकता है।
देश और समाज की स्वच्छता पर केंद्रित संगोष्ठी का आरंभ राष्ट्रगान से हुआ। बच्चों द्वारा ऋग्वेदीय ऋचाओं का पाठ किया गया। जहां आज कल के बच्चे ठीक से हिंदी नहीं बोल पाते, वहीं संस्कृत के कठिन श्लोकों का उच्चारण शिव शिष्य बच्चे ही कर सकते हैं। फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार अर्चित आनंद ने बताया कि स्वच्छता से संबंधित लगभग पचास से अधिक संगोष्ठी कर चुके हैं। जागरूकता तो आई है, पर इसमें तेजी लाने की जरूरत है। जब हम अपने आसपास को स्वच्छ नहीं रखेंगे तो देश कैसे आगे बढ़ेगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वच्छता के लिए कानून बनाये गए हैं। इसकी समझ तो नैसर्गिक होनी चाहिए।
न्यास की अध्यक्ष बरखा सिन्हा ने शिव शिष्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिव की दया से ही कुछ भी संभव है। साहब की बात मान कर आगे बढ़िए। शिव शिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद ने वरेण्य गुरुभ्राता द्वारा प्रदत्त तीन सूत्रों में प्रथम सूत्र को अहम बताते हुए कहा कि गुरु से संबंध तो बनाना ही होगा तभी शिव अपने शिष्य पर दया करेंगे। रामेश्वर मंडल ने भगवान शिव एक सांस्कृतिक धरोहर पर प्रकाश डाला।
इस कार्यक्रम में दक्षिण भारत के कई राज्यों समेत पश्चिम बंगाल से लगभग चार हज़ार लोग शामिल हुए। शिव शिष्यों ने आयोजकों को धन्यवाद दिया। उक्त जानकारी कन्हैया जी ने दी।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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