बोकारो, रांची, धनबाद, गढ़वा, गोड्डा खूंटी, पाकुड़ में मिल रहे सूखे के संकेत

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रांची :-  झारखंड के सात जिलों में बारिश सामान्य से आधे से भी कम हुई है. इन जिलों में सूखे के संकेत मिल रहे हैं. स्थिति एक सप्ताह में नहीं सुधरी, तो धान की खेती मुश्किल हो जायेगी. पूरे राज्य में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश हुई है. 
पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

मौसम के हालात पर कृषि विभाग नजर रखे हुए हैं. एक सप्ताह बारिश नहीं हुई, तो किसानों को आकस्मिक फसल की सलाह देगा. एक जून से लेकर 19 जुलाई तक राज्य में 237 मिमी ही बारिश हुई है, जबकि इस अवधि के दौरान करीब 400 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी. 
एक अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान नहीं : मौसम विभाग ने शुक्रवार को पूर्वानुमान जारी किया है. इसके अनुसार 22 जुलाई तक मॉनसून कमजोर रहेगा. 23 से लेकर 25 जुलाई तक मॉनसून सक्रिय रहेगा, लेकिन बहुत अधिक बारिश नहीं होगी. इस दौरान भी सामान्य से कम ही बारिश होगी. 
26 जुलाई से एक अगस्त तक मॉनसून सामान्य रह सकता है. विभाग के अनुसार 26 जुलाई से एक अगस्त तक करीब 87 मिमी बारिश होनी चाहिए, इसकी तुलना में 92 मिमी बारिश का अनुमान है. 25 जुलाई तक मात्र 56.2 मिमी बारिश का अनुमान है, जबकि इस अवधि में करीब 90 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. 
पलामू और हजारीबाग प्रमंडल में अब तक रोपा शुरू नहीं :  राज्य में तय लक्ष्य का मात्र 11 फीसदी खेतों में ही धान लगाया जा सका है. विभाग ने 1800 हजार हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य रखा है. इसमें मात्र 205 हजार हेक्टेयर में ही धान लगाया जा सका है. 
हजारीबाग और पलामू प्रमंडल में तो अब तक रोपा का काम भी शुरू नहीं हुआ है. संताल परगना में चार फीसदी तथा दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में नौ फीसदी रोपा हुआ है. कोल्हान प्रमंडल में करीब 36 फीसदी खेतों पर धान लगाया जा चुका है. यहां चाईबासा जिले में छींटा धान लगाया जाता है. इस कारण यहां तय लक्ष्य का करीब 70 फीसदी खेतों पर धान छींटा जा चुका है.
 
चिंताजनक हो रहे हालात
पूरे राज्य में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम हुई है बारिश, मौसम के हालात पर नजर रखे हुए कृषि विभाग 
एक जून से 19 जुलाई तक होनी चाहिए थी 400 मिमी बारिश, लेकिन 237 मिमी बारिश ही हुई इस अवधि में
अब मौसम में बदलाव आधारित कृषि योजना बनायी जाये
 
बीएयू में आकस्मिक कृषि योजना पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन 
रांची. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर के कुलपति डॉ एके सिंह ने कहा है कि विगत वर्षों में झारखंड राज्य के मानसून मौसम में काफी विभिन्नता एवं बदलाव देखने को मिल रहा है. 
 
कृषि वैज्ञानिकों को भावी रणनीति तयकर कृषि विकास की योजना बनाने की जरूरत है. डॉ सिंह शुक्रवार को बीएयू में आकस्मिक कृषि योजना विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने आकस्मिक कृषि योजना पर लिखित तकनीकी पुस्तिका का विमोचन भी किया. 
 
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, नयी दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ केके सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग के द्वारा वर्ष 2008 से क्षेत्रवार संभावित पांच दिनों के मौसम की जानकारी दी जा रही थी. जल्द ही राज्य के 17 जिलों में एग्रोमेट स्थापित होगा और कृषि वैज्ञानिक किसानों को सटीक सलाह दे पाना संभव हो जायेगा. जिससे किसान सही तरीके से खेती कर सकें. 
 
26 से झारखंड में अच्छी बारिश की संभावना 
प्रादेशिक मौसम विभाग, रांची के निदेशक डॉ एसडी कोटल ने बताया कि राज्य में एक जून से सभी 263 प्रखंडों को आगामी दो सप्ताह के संभावित मौसम की जानकारी दी जा रही है. 
 
इससे कृषि योजना बनाने में मदद मिल रही है. 26 जुलाई से अच्छी बारिश होने की संभावना है. अध्यक्षता करते हुए बीएयू के कुलपति डॉ आरएस कुरील ने मौसम की प्रतिकूल स्थिति को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों को किसान हित में कृषि विविधिकरण पर प्राथमिकता देने को कहा.
  
किसानों को मिली सलाह 
कृषि भौतिकी एवं मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ ए वदूद ने झारखंड राज्य के लिए आकस्मिक कृषि योजना की रूपरेखा रखी. मानसून की इस विषम आपात स्थिति के कारण विभिन्न फसलों का कुल 17 प्रतिशत ही अच्छादन हुआ है. 
 
विवि के एग्रीकल्चर  डीन डॉ एमएस यादव ने किसानों को धान की सीधी बोआई करने की सलाह दी. अनुसंधान निदेशक डॉ डीएन सिंह ने  किसानों को ऊपरी भूमि में धान की जगह मक्का, दलहन, मड़ुआ, तेलहन आदि की खेती करने की सलाह दी.

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