सुबोधकांत को राजेंद्र बाबू की अंत्येष्टि में शामिल न हो पाने का दुःख

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मुंबई। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने बेरमो विधायक सह इंटक महासचिव राजेंद्र प्रसाद सिंह की अंत्येष्टि में शामिल न हो पाने पर अफसोस व्यक्त किया है। वे लॉकडाउन में मुंबई में फंसे हुए हैं। वहीं उनको राजेंद्र बाबू के निधन की जानकारी मिली। मुंबई से हवाई सेवा शुरू न होने के कारण वे कसमसा कर रह गए। श्री सहाय के मुताबिक राजेंद्र बाबू 40 वर्षों से भी अधिक समय तक की राजनीतिक यात्रा में उनके सहयात्री रहे। झारखंड में कांग्रेस का झंडा बुलंद रखने में उनकी बड़ी भूमिका रही। कोयलांचल समेत तमाम निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के उद्योगों में कांग्रेस समर्थित इंटक के जरिए उन्होंने मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने का काम किया। वे ऐसे समय में सूक्ष्म लोक के लिए प्रस्थान कर गए जब उनका अंतिम दर्शन भी मयस्सर नहीं हो सका। श्री सहाय ने राजेंद्र बाबू को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ट्रेड यूनियन और संसदीय राजनीति में उनकी कमी लंबे समय तक खलती रहेगी।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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