हेमंत सोरेन की बेचारगी का सबब!

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कोटा में फंसे अपने प्रदेश के तीन हजार छात्रों को और हजारों प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के पक्ष में हैं लेकिन वे आर्थिक संकट का रोना रो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इसके लिए मदद मांगी है। उनका कहना सही हो सकता है क्योंकि उनके शपथ ग्रहण के साथ ही यह बात सामने आई थी कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य का खजाना पूरी तरह खाली कर गए हैं।

जबतक हेमंत सोरेन आर्थिक संसाधनों को मजबूत करते कोरोना का संकट शुरू हो गया और सारी गतिविधियां ठप्प हो गईं। आर्थिक संकट तो है लेकिन अगर इच्छाशक्ति हो तो इसका निदान राज्य के अंदर ही संभव है। झारखंड एक खनिज और उद्योग बहुल राज्य है। वहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं जो मानवसेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। राज्य के मुख्यमंत्री एकबार आह्वान कर दें तो अपने नागरिकों को वापस उनके घरों तक पहुंचाने के लिए धन की कमी नहीं होगी।

कोटा में जो छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश कुलीन या मध्यमवर्गीय परिवारों से संबंध रखते हैं। वे इस मुहीम के लिए जनता से भी सहयोग का आह्वान कर दें तो धन की कमी नहीं होगी। झारखंड के पास बसों की भी कमी नहीं है। निश्चित रूप से हेमंत जी को आपदाओं से निपटने का अनुभव नहीं है लेकिन जब संकट का समय आता है तो हाथ पर हाथ धरे रहने से काम नहीं चलता। संकट निवारण के लिए उद्यम करना होता है। अब छात्रों और प्रवासी मजदूरों को शरण देने वाले राज्य भी अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों ने बाहरी लोगों को राज्य की सीमा पर ले जाकर छोड़ देने का निर्णय लिया है।

किसी राज्य की जनता को इस तरह बेचारगी के आलम में बेसहारा छोड़ देना उनके गृहराज्य के लिए कितना अपमानजनक हो सकता है हेमंत सोरेन जी समझ सकते हैं। वे एक सुलझे हुए नौजवान नेता हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे जिद्दी, संवेदनहीन और मोटी चमड़ी के सठिआये नेता नहीं हैं। उन्हें तुरंत सीसीएल, बीसीसएल, मेकॉन, बीएसएल, टेल्को, टिस्को जैसी कंपनियों के प्रबंधकों, चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। राज्य की जनता का आह्वान करना चाहिए और समस्या का निदान करना चाहिए। झारखंड सरकार का खजाना खाली हो सकता है लेकिन झारखंड की जनता और उद्योगपतियों का खजाना कभी खाली नहीं हो सकता। वे पूरे देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की ताकत रखते हैं।

1 Comment
  1. अरुण सिन्हा says

    महोदय, एक ही मुर्गे को कितनी बार हलाल किया जाएगा।चुनाव केलिए तो जम के वसूली कीगई है। कर्मचारियों की वेतन कटौती कर हजारो करोड़ रुपये झारखंड में संचालित सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं से वसूल कर केंद्र सरकार को दिए जा चुके है। वड़त्वीकता यह है कि, अकेले मुख्यमंत्री महोदएवम उनके MLAs के पास इतने पैसे हैं कि, वे अपनी समस्यायों का समाधान निकाल सकते है।अपने सही कहा इक्षा शक्ति होनी चाहिए।
    रह गई बात नीतीश जी की तो उनकी अपनी परिस्थितियां है।

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