हेमंत और सुबोधकांत का परिश्रम रंग लाया

अब सरकार में भागीदारी का रोडमैप तैयार

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देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

नई दिल्ली। झारखंड में महागठबंधन की जीत के बाद भाजपा खेमे में निराशा व्याप्त है जबकि कांग्रेस, झामुमो और राजद खेमे में हर्ष व्याप्त है। इस चुनाव में सबसे बड़ी बात यह रही कि महागठबंधन में शामिल दलों के राज्यस्तरीय कद्दावर नेता ही जी जान से लगे रहे, स्टार प्रचारकों के चरण अंतिम चरण में पहुंचे। स्थानीय नेता ही विपक्ष के वोटों के बिखराव को रोकने में पूरी तरह सफल रहे। तभी कांग्रेस 6 से 16 सीटों तक और झामुमो 18 से 30 सीटों तक पहुंच पाया।

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री प्रत्याशी हेमंत सोरेन, काग्रेस के दिग्गज नेता सुबोधकांत सहाय ने भाजपा को सत्ता से बाहर करने का संकल्प पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सुबोधकांत सहाय तो खैर स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहे थे इसलिए उनके पास सभी 81 विधानसभा क्षेत्रों का निरंतर दौरा करने का पर्याप्त समय था लेकिन हेमंत सोरेन स्वयं दो सीटों से खड़े होने के बावजूद महागठबंधन के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य की परिक्रमा करते रहे।

सुबोधकांत सहाय को चुनाव कंपेन समिति की जिम्मेदारी दी गई थी जिसे उन्होंने सफलता पूर्वक निभाया। उनकी कोशिशें रंग लाईं। जिन सीटों पर महागठबंधन के प्रत्याशी जीत नहीं सके वहां भी कांटे की टक्कर दी। रांची में महुआ माजी ने सीपी सिंह जैसे दिग्गज नेता के पसीने छुड़ा दिए। हटिया से अजय नाथ शाहदेव आजसू के सीटिंग एमएलए नवीन जायसवाल को हरा नहीं सके लेकिन एक लाख से अधिक वोट लाकर पार्टी की ताकत दिखा दी। सिबोधकांत सहाय ने अपने सारे समर्थकों को रांची से महागठबंधन प्रत्याशी झामुमो नेत्री महुआ माजी, हटिया से कांग्रेस प्रत्याशी अजयनाथ शाहदेव. खिजरी से राजेश कच्छप और कांके से सुरेश बैठा के पक्ष में पूरी ताकत झोंक देने की हिदायत दी थी। कांग्रेस के वोट महागठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में शत-प्रतिशत पड़ें इस मामले में वे बेहद सजग रहे। हेमंत सोरेन भी सुबोधकांत सहाय के 40 साल के राजनीतिक जीवन के अनुभवों का लाभ उठाने का कोई मौका हाथ से नहीं निकलने दे रहे।

उल्लेख्य है कि महागठबंधन की चुनावी रणनीति राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने बनाई थी। लिहाजा जीत के बाद हेमंत सोरेन और सुबोधकांत सहाय लासलू प्रसाद से मिलने गए और सरकार के स्वरूप और भावी रणनीति पर मश्विरा लेने गए। रघुवर सरकार लालू प्रसाद को जेल से बाहर आने में बाधक बनी हुई थी। अब उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही बाहर निकलेंगे और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की राजनीति को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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