गुंडाराज से तंग बाघमारा में बह रही परिवर्तन की बयार

बाघमारा विधान सभा का हाल

0 438

 

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

प्रतिनिधि

धनबाद। बाघमारा विधान सभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से विधायक ढुल्लू महतो का कांग्रेस के जलेश्वर महतो से एक बार फिर कांटे का संघर्ष होगा जबकि झाविमो प्रत्याशी संतोष महतो और और आजसू तथा लोजपा के प्रत्याशी चुनाव को बहुकोणीय बनाने का प्रयास करेंगे। पिछले दो चुनावों में ढुल्लू महतो जलेश्वर महतो को पराजित करते रहे हैं। बाघमारा गिरिडीह संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। आजसू और लोजपा ने अभी अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से आजसू के टिकट पर चंद्रप्रकाश चौधरी चुनाव जीते थे। उन्हें बाघमारा विधानसभा क्षेत्र में जबर्दस्त बढ़त मिली थी। तब आजसू एनडीए का हिस्सा था। श्री चौधरी को विधायक ढुल्लू महतो का समर्थन मिला था। लेकिन गठबंधन से अलग होने पर भी आजसू को यहां हल्के में नहीं लिया जा सकता। सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी यहां आजसू के पक्ष में अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।

दस वर्ष पहले 2009 के चुनाव में ढुल्लू महतो युवा चेहरा के रूप में उभरे थे। उन्होंने तत्कालीन विधायक और मंत्री जलेश्वर महतो को पराजित कर दिया था। बाघमारा वासियों को उम्मीद थी कि युवा नेता ढुल्लू महतो विकास की गंगा बहाएंगे। लेकिन ढुल्लू महतो दबंगों की कतार में शामिल हो गए और उनपर कोयला खदान क्षेत्रों में रंगदारी वसूली समेत कई तरह के आपराधिक आरोप लगे। लिहाजा तीसरी पाली खेलना उनके लिए आसान नहीं होगा। अभी भाजपा और आजसू का गठबंधन टूटने के बाद यंहां की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। ढुल्लू के आतंक राज के खिलाफ परिर्वतन की हवा बहने लगी है। इसको भुनाने में कांग्रेस प्रत्याशी जलेश्वर महतो के अलावा जेवीएम प्रत्याशी संतोष महतो तथा आजसू लोजपा एंव जदयू के संभावित प्रत्याशी भी जोर ल्रगाये हुए है। परिवर्तन की हवा में युवा वर्ग का वोट काफी मायने रखता है। इस बार युवाओं का रूझान कॉग्रेस और जेवीएम के प्रति देख जा रहा है।

बाघमारा को कोयला उद्योग का स्वर्ग माना जाता है लेकिन रंगदारों के सिंडिकेट ने इसे नर्क से भी बदतर बना दिया है। वर्ष 2009 के चुनाव में बाघमारा के मतदाताओं ने रंगदारी वसूलने के लिए वोट नहीं दिया था। लोगों को उम्मी थी कि बाघमारा के अच्छे दिन आएंगे। विकास का जाल बिछ जायेगा। नए उद्योग लगेंगे। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। असंगठित मजदूरों को हर दिन काम मिलेगा। कारण है कि बाघमारा विस क्षेत्र में ही मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त बीसीसीएल की एक से छह एरिया की कई लाभप्रद कोलिरियां व वाशरी है। दो साल में बनने वाली न्यू कोलवाशरी का निर्माण भी अभी तक नहीं हो पाया है। जहां रोजगार के लिए कई साधन मौजूद है। फिर भी दस साल के बाद स्थिति उम्मीद के विपरीत है। वर्ष 2009 के बाद 2014 के विस चुनाव में भी ढुल्लू महतो रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीत कर लगातार दूसरी बार विधायक बने। उनके दस साल के दौरान न विकास का जाल बिछा न कोई इंजीनियरिंग कॉलेज बना, न रोजगार बढ़े और न ही कोई नया उद्योग खुला। बल्कि दस हजार से अधिक असंगठित मजदूरों के हाथ से काम छिन गया। विस्थापितों को जमीन के बदले नियोजन भी नहीं मिला। कई कोयला व्यवसायी अपना धंधा बंद कर यहां से पलायन कर गए। एक के बाद एक निवेशकों के भागने का सिलसिला बन गया।

निर्माणधीन अत्याधुनिक भूमिगत खदान पर लगा ग्रहण

बरोरा एरिया के मुराईडीह एंव ब्लॉक दो में निर्माणधीन अत्याधुनिक भूमिगत खदान में अशांति के कारण ग्रहण लग गया। यदि समय पर भूमिगत खदान का निर्माण हो जाता तो करीबन 4 हजार लोगों को रोजगार मिलता। साथ ही कई रैयतों को नियोजन व मुआवजा भी मिलता। इसमें इंजीनियर, डिप्लोमा किए हुए युवकों को प्राथमिकता के आधार पर नियोजन मिलता। विपक्षी नेता कहते हैं कि ब्लॉक टू के बेनीडीह व जमुनिया कोलियरी में अगर गुंडाराज  कायम नही होता तो बड़ी कोल कंपनी यहां आउटसोर्सिंग का काम शुरू करती और कम से कम 750 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता। रंगदारी के कारण कोल कंपनी ने कार्य शुरू करने के साथ ही अपना काम-काज समेट लिया। धनबाद के डीसी के आदेश के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका।

इस बीच बीसीसीएल की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना बरोरा व ब्लॉक-टू की कोलियरियों में रंगदारी के भय से कोयला व्यवसायियों ने अपना कारोबार समेट लिया। नतीजतन नौ महीने तक कोलडंप बंद रहा। हार्डकोक भट्ठा उद्यमी ने भी रंगदारी के कारण अपना काम बंद कर दिया। जिन व्यवसायियों ने हिम्मत जुटा कर रंगदारी का सामना किया रंगदारों ने उनका डीओ ही नहीं लगने दिया। रंगदारी के कारण प्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों असंगठित मजदूर बेकार हो गए। करीबन दो साल से चली आ रही गुंडागर्दी से व्यवसायी पूरी तरह तंग आ गए। कोलियरियों में वर्चस्व को लेकर जोर-आजमाइश चलती रही। आतंक का ऐसा माहौल बना कि टर्म पूरा होने से पहले ही तीन आउट सोर्सिंग कंपनियां वापस चली गईं। इसके कारण करीब दो हजार मजदूरों के सामने बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई। शैली एंव एसीसीपीएल नामक आउट सोर्सिंग कंपनियों में कमा खा रहे सात सौ मजदूर रंगदारी के कारण बेकार हो गए दोनो कंपनियां ताला बंद कर चली गईं। ब्लॉक-टू में बडे पैमाने पर कोयला उत्खनन करने के लिए नई आउट सोर्सिंग कंपनी के लिए टेंडर पर टेंडर निकाला गया लेकिन रंगदारी के कारण कोई नई कंपनी यहां आने को तैयार नहीं हुई। नतीजतन हर बार टेंडर फेल हो गया। अब बाघमारा की जनता विधायक की दबंगई से तंग आ चुकी है। बाघमारा विधानसभा क्षेत्र मे परिवर्तन की आकांक्षा बलवती हो रही है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: