पूर्वी जमशेदपुर में होगी ग्लैमर, जन निष्ठा और दल निष्ठा की जंग

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देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा के बागी सरयू राय और कांग्रेस के स्टार प्रवक्ता डॉ गोविंद वल्लभ ने पूर्वी जमशेदपुर सीट पर सोमवार को नामांकन की अंतिम तिथि को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। तीन दिग्गजों के मैदान में हे से यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। अब वहां ग्लैमर, जन निष्ठा और दल निष्ठा के बीच की जंग का आगाज हो चुका है। राज्य का मुखिया होने के नाते रघुवर दास की भाजपा में पकड़ ज्यादा मजबूत है। पांच वर्षों के विकास कार्यों की उपलब्धियां, पीएम मोदी का मैजिक और गृह मंत्री अमित साह की रणनीति उनके साथ है। उनकी निष्ठा जितनी झारखंड के विकास के प्रति है उससे कुछ ज्यादा ही पार्टी के प्रति है। आमतौर पर भाजपा के शीर्ष नेताओं का स्वभाव जिद भरा होता है। उसमें सत्ता के अहंकार की भी झलक होती है। वे नुकसान सह लेते हैं लेकिन समझौते नहीं करते। महाराष्ट्र इसका ज्वलंत उदाहरण है। पीएम मोदी के कार्यकाल में भाजपा नेताओं के पांव ज़मीन पर कम हवा में ज्यादा नज़र आते हैं। डॉ गोविंद वल्लभ एक प्रखर अर्थशास्त्री हैं और सोशल मीडिया पर छाए रहने के नाते काफी लोकप्रिय हैं।

सरयू राय की निष्ठा पार्टी के प्रति है लेकिन इतनी गहरी नहीं कि अंदरखाने में चल रही गड़बड़ियों को नज़र-अंदाज़ कर जाएं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका अभियान निरंतर चलता रहा है। चाहे वे सत्ता में हों या विपक्ष में अथवा किसी संसदीय संस्था में नहीं भी हों। वे घोटालों पर नज़र रखते हैं और उनके प्रमाण जुटाते रहते हैं। व्यक्तिगत रूप से उनकी छवि साफ सुथरी रही है। यही कारण है कि उनके प्रति आम जनता ही नहीं, विरोधी दलों के नेताओं के मन में भी सम्मान का भाव रहता है। यही कारण है कि उनकी उपेक्षा और बगावत की खबर मिलते ही विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने उन्हें खुला समर्थन देने की बात कही है। कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ गोविंद वल्लभ को सीएम रघुवर दास के खिलाफ चुनाव में उतारने की पहले ही घोषणा कर दी थी। अब बदले हुए परिदृश्य में कांग्रेस का क्या रुख होगा कहना कठिन है। विपक्षी गठबंधन के रणनीतिकार लालू प्रसाद हैं जो चारा घोटाले के मामले में सज़ा काट रहे हैं और इलाज के लिए रिम्स में भर्ती हैं। फैसला उन्हें ही करना है। यदि गोविंद वल्लभ मैदान में रह गए तो त्रिकोणात्मक संघर्ष होगा अन्यथा रघुवर दास और सरयू राय के बीच कांटे का संघर्ष होगा।

पूर्वी जमशेदपुर विधानसभा का अधिकांश हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत आता है जहां विभिन्न प्रदेशों से आए नौकरीपेशा और उद्यमी रहते हैं। इस तरह के मिश्रित समाज में विकास से ज्यादा अहम रोजगार का मुद्दा होता है। मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक मंदी का ऑटोमोबाइल सेक्टर पर गंभीर असर पड़ा है। इसके कारण टाटा कंपनी के हजारों कर्मियों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इसका असर चुनाव पर पड़ सकता है। हालांकि इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। राज्य सरकार ने अपने हिस्से का काम करने में कोई कोताही नहीं की है। दूसरी बात यह कि इसी आबादी पर हिंदुत्व के उन्माद का सर्वाधिक प्रभाव रहता है। अब वह चुनाव को किस चश्मे से देखेगी, कहना कठिन है। लेकिन यह सवाल तो उठेगा ही कि सरयू राय को भाजपा ने टिकट से किस आधार पर वंचित रखा। पार्टी उनके बारे में क्या सोचती है इससे आम जनता का कुछ लेना देना नहीं है। सार्वजनिक जीवन में उनके आचरण पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।

सरयू राय की पूंजी उनका जुजारूपन और बेदाग छवि है। वे सर्वसुलभ नेता रहे हैं। उनसे की भी आसानी से मिल सकता है। अपनी बात कह सकता है। वे लोगों की समस्याएं सुलझाने का भरसक प्रयास भी करते हैं। जबकि मुख्यमंत्री होने के नाते रघुवर दास की अपनी सीमाएं हैं। उन्हें जबर्दस्त सुरक्षा घेरे में रहना होता है। उनसे मिलने में बहुत सारी औपचारिकताएं आड़े आती हैं। उनका व्यवहार भी थोड़ा रूखा है। सरयू राय ने जो संकेत दिए हैं उनके मुताबिक सत्ता के अंदरखाने में कुछ बड़ी गड़बड़ियों के प्रमाण उनके पास मौजूद हैं। उनका खुलासा वे चुनाव के दौरान करेंगे। वे लालू प्रसाद और मधु कोड़ा को जेल भिजवा चुके हैं। अब उन्होंने दावा किया है कि तीसरे मुख्यमंत्री को भी जेल जाने की नौबत आ सकती है। उनके पिटारे में किस तरह के दस्तावेज़ हैं, कितनी विस्फोटक सामग्रियां हैं यह उनके खुलासा होने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि पूर्वी जमशेदपुर के चुनाव पर झारखंड ही नहीं, पूरे देश की नज़रें लगी रहेंगी।

जीत-हार अपनी जगह है लेकिन इतना तय है कि यदि विपक्षी पार्टियों ने सरयू राय को खुला समर्थन दे दिया तो मुख्यमंत्री रघुवर दास को नाकों चने चबाने की नौबत आ सकती है।

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