राजेंद्र बाबू के निधन से औद्योगिक क्षेत्रों में शोक की लहर

0 108

-देवेंद्र गौतम

भारत में मजदूरों हितों की सबसे बुलंद आवाज़ बेरमो विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह नहीं रहे। दिल्ली में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। फेफड़ों में फंगल इंफेक्शन के कारण पिछले 3 मई को उन्हें एयर लिफ्ट कर दिल्ली लाया गया था। वे संयुक्त बिहार में दो बार और झारखंड में एक बार मंत्री रह चुके थे। इंटक के संस्थापक नेताओं में एक बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। वे इंटक के राष्ट्रीय महासचिव, इंडियन माइन्स वर्कर्स फेडरेशन के अध्यक्ष, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के केंद्रीय अध्यक्ष, कोल इंडिया सुरक्षा परिषद और जेबीसीसीआई के सदस्य थे। वे छह बार बेरमो के विधायक रहे थे। उनके निधन की खबर मिलने के बाद कोयलांचल समेत देश के तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। वे न सिर्फ इंटक और न सिर्फ कांग्रेस बल्कि सभी यूनियनों और दलों के लोगों के बीच लोकप्रिय थे। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन सहित देश के जाने-माने नेताओं ने उनके प्रति शोक संवेदना प्रकट की है। वे व्यक्तिगत संबंधों में दलीय भावना को नहीं आने देते थे और सभी की मदद के लिए तैयार रहते थे।

मजदूर नेता के रूप में उनकी कार्यशैली हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी खासियत यह थी कि जब वे बेरमो में होते थे तो उनसे हर कोई मिल सकता था। वे मजदूरों से लेकर अधिकारियों तक सबकी समस्याएं सुनते थे और समाधान का प्रयास करते थे। उनकी बोली बहुत मीठी और आत्मीयता भरी थी। वे अपने पीछे आठ पुत्रियां और दो पुत्र छोड़ गए हैं। उनके बड़े पुत्र जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह उनके राजनीतिक कार्यों में भरपूर सहयोग देते थे। कोयलांचल के युवा वर्ग में उन्होंने जबर्दस्त पैठ बना रखी है। झारखंड के लोग उन्हें राजेंद्र बाबू के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। कुमार गौरव राजेंद्र बाबू के छोटे पुत्र हैं। आने वाले समय वे जयमंगल सिंह अपने पिता की विरासत को किस हद तक संभाल पाते हैं यही देखना है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: