…तो क्या तुग़लक के रास्ते चल पड़े हेमंत सोरेन!

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हाल तक प्रवासी मजदूरों के प्रति संवेदनशीलता और कोरोना वायरस से जंग के प्रति सतर्कता के कारण चर्चा में थे। लेकिन इन दिनों वे एक तुगलकी निर्णय को लेकर सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं। उन्होंने मास्क नहीं पहनने पर एक लाख रुपये जुर्माना या दो वर्ष की जेल की सज़ा का नियम बनाया है। इसे कैबिनेट से मंजूरी दिला दी है और इसे कानून बनाने के प्रयास में हैं। यदि यह निर्णय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया होता, या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी मंत्री ने लिया होता तो हैरानी नहीं होती लेकिन झारखंड आंदोलन का नेतृत्व कर चुकी पार्टी के एक पढ़े-लिखे और सुलझे हुए नेता ऐसा बेतूका निर्णय ले सकते हैं, यक़ीन नहीं होता। केंद्र सरकार के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले वर्ष न्यू मोटर व्हेकिल एक्ट के तहत भारी भरकम जुर्माने का नियम बनाया था। उनका तर्क था कि इससे दुर्घटनाओं मे कमी आएगी। लॉकडाउन के समय तो सड़क पर गिने चुने वाहन थे, लेकिन दुर्घटनाएं नहीं रुकी थीं।

जहां तक मास्क का सवाल है, दुनिया कोई नेता, कोई चिकित्सक इस बात की गारंटी नहीं ले सकता कि मास्क पहनने से कोरोना का संक्रमण नहीं होगा। इंडियन मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष ने हाल में बयान दिया था कि कोरोना रोगियों के इलाज के दौरान 99 डाक्टरों की कोरोना के संक्रमण से मौत हो गई। हजारों बीमार पड़े। उन्होंने तो मास्क ही नहीं पीपीई किट पहन रखा था। फिर भी कोरोना वायरस ने उनकी जान ले ली। ऐसे में हेमंत सोरेन जी क्या इस बात की लिखित गारंटी दे सकते हैं कि मास्क पहनने वाले को कोरोना नहीं होगा?

झारखंड की चिकित्सा व्यवस्था विश्वस्तरीय होने का दावा भी वे नहीं कर सकते। जब राजधानी दिल्ली की चिकित्सा सुविधा की सांस कोरोना की जंग में फूलने लगी तो झारखंड की स्थिति क्या है, जगजाहिर है। सत्ता में बैठने के बाद सिर्फ अधिकारों का मनमाना इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। यह काम भाजपा के जिम्मे ही छोड़ देना चाहिए। गैर भाजपा सरकारों को अपने कर्तव्यों का भी भान होना चाहिए। आमजन की भावनाओं का अनादर कर राजनीति की जनविरोधी और अराजक शैली से बचना चाहिए। हेमंत सोरोन यदि जनता को जागरुक करन की भाषा बोलते तो इसको सराहा जाता लेकिन सत्ता के अहंकार की भाषा बोलना उन्हें शोभा नहीं देता। शिबू सोरेन ने जिस राजनीतिक धारा की शुरुआत की थी हेमंत सोरेन के लिए उससे विचलित होना उचित नहीं है। जनता और उसकी भावनाओं से जुड़े रहकर ही वे अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इस तरह के तुगलकी निर्णयों से बचने की जरूरत है।

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