पालघर मॉब लिंचिंग को लेकर संत समाज में उबाल

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पालघर में जुना अखाड़े के दो साधुओं की मॉब लिंचिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना की चतुर्दिक निंदा की जा रही है। महाराष्ट्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसके 110 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। घटनास्थल पर मौजूद दो सिपाहियों को निलंबित किया जा चुका है। मामले की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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इस घटना से नाराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है।

घटना में गुरुवार 16 अप्रैल की रात की है। दो साधु महाराज कल्पवृक्ष गिरि (70) और महाराज सुशील गिरि (35), और उनके चालक नीलेश तेलगड़े (30)मुंबई के कांडिवली से सूरत की ओर जा रहे थे। जब वे पालघर के पास पहुंचे तो टॉल चेक नाका पर पुलिस ने उनकी गाड़ी रोक दी। उनके पास यात्रा की कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं थी। उन्हें वापस लौटने को कहा गया। उन्होंने शार्टकट रास्ते से आगे निकलने के चक्कर में गांव की ओर गाड़ी घुमवा दी। गांव में कई दिनों से चोरों का आतंक छाया हुआ था। इसी कारण वहां दो सिपाही तैनात किए गए थे। गांववालों ने जब रात के समय अनजान गाड़ी को गांव की ओर आते देखा तो उन्हें चोरों के आगमन का संदेह हुआ। उन्होंने गाड़ी रुकवाई और बिना कुछ पूछे उसपर सवार साधुओं और उनके ड्राइवर को खींचकर बाहर निकाला और उनकी पिटाई शुरू कर दी। गाड़ी को उलट दिया। सिपाही कुछ समझ नहीं सके। उन्होंने थाने में खबर की। पुलिस बल के पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनपर भी हमला किया। किसी तरह पुलिस सभी घायलों को लेकर अस्पताल पहुंची जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

देश में किसी साधु की मॉब लिंचिंग की यह पहली घटना थी। इस घटना को लेकर केंद्र से राज्य सरकार तक में हड़कंप मच गया। आम लोगों के साथ साधु समाज भी इस घटना को लेकर क्रोधित हो उठा। अब एबीएपी के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हमले में शामिल सभी दोषियों को सजा नहीं दी गई तो लाखों नागा साधु और विभिन्न अखाड़ों के सदस्य लॉकडाउन हटने के बाद महाराष्ट्र की ओर मार्च निकालेंगे। महाराष्ट्र सरकार को सभी पुलिस अधिकारियों को नौकरी से निकाल देना चाहिए जो संतों की रक्षा करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रावण राज है, जहां पुलिस की मौजूदगी में साधुओं की हत्या की जा रही है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निकाल देने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

उन्होंने कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई है, उसे सील किया जाना चाहिए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लॉकडाउन हटने के बाद अखाड़ा परिषद हरिद्वार में आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा। जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि ने भी अपने अखाड़े के संतों की निर्मम हत्या की निंदा की। उन्होंने कहा कि इन हत्याओं की निंदा करने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। पुलिस निर्दोष साधुओं की रक्षा करने में विफल रही। अन्य अखाड़ों के प्रमुखों ने भी इस घटना की निंदा की है। इस घटना के कारण देशभर में आक्रोश का माहौल है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मामले में सख्त कार्रवाई का वादा किया है। शुरू में कुछ शरारती तत्वों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके। अब ल़ॉकडाउन टूटने तक इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो संत समाज के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।

 

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