90 पार के ह्रदयरोगियों के सफल इलाज का कारनामा

कोलकाता के डा. कोहली ने पेश की मिसाल

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पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

कोलकाता। आमतौर पर 80 वर्ष से अधिक आयु के ह्रदयरोगियों को पेसमेकर अथवा एंजियोप्लास्टी लगाना जोखिम भरा कार्य माना जाता है। इसमें मरीज का इलाज के दौरान मौत हो जाने का खतरा होता है। लेकिन कोलकाता के जाने-माने डाक्टर डी कोहली ने इस धारणा को गलत साबित किया है। उन्होंने 90 के दशक से अभी तक 90 पार के कई लोगों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर एक मिसाल पेश की है। उनमें 94 और 97 वर्ष आयु के दो ह्रदयरोगी ऐसे थे जो 100 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी जांच के लिए आते रहे। डां कोहली के मुताबिक चिकित्सा उपकरण और तकनीक इतना विकसित हो चुके हैं कि वृद्ध मरीजों की भी सफलतापूर्वक एंजियोप्लास्टी की जा सकती है। इसमें चिकित्सक को थोड़ी सावधानी अवश्य बरतनी पड़ती है। हाल में डा. कहाली ने 95 वर्ष के एक ऐसे मरीज की एंजियोप्लास्टी की जिसकी दो रक्तवाहनियां अवरुद्ध थीं और उसे ऑपरेशन के 36 घंटे के अंदर घर भेज दिया। डा. कोहली के मुताबिक एंजियोप्लास्टी ही नहीं पेसमेकर,सीआरटी और आइसीडी प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। युवा अथवा मध्य आयु के लोगों का इलाज तो और भी बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

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