पत्रकार सुनील सौरभ ‘विद्यावाचस्पति’ व ‘हिंदी भूषण श्री’ सम्मान के लिए चयनित

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गया। बिहार के जाने-माने पत्रकार व साहित्यकार सुनील सौरभ को हिन्दी पत्रकारिता व साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ (भागलपुर) द्वारा ‘विद्यावाचस्पति’ सम्मान के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह सम्मान 18-19 दिसम्बर 2021 को विद्यापीठ परिसर में आयोजित समारोह में दिया जाएगा।
केबी हिंदी सेवा न्यास,बदायूं ,उत्तर प्रदेश की ओर से भी सुनील सौरभ को हिंदी की सेवा के लिए ‘ हिंदी भूषण श्री’ सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है।यह सम्मान नबम्बर 2021 के अंतिम सप्ताह में बदायूं में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा। सम्मान में धनराशि,शॉल,प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र व पुष्पगुच्छ  सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि सुनील सौरभ पिछले साढ़े तीन दशक से अधिक समय से हिन्दी पत्रकारिता तथा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए सक्रिय हैं। इन्होंने पत्रकारिता जगत में अपनी सेवाएं दैनिक हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा,आज, पाटलिपुत्र टाइम्स तथा साप्ताहिक चौथी दुनिया, खबरदार इंडिया के अलावा अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में दी है। इनकी तीन काव्य संग्रह और दो शोध पुस्तक समेत आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। अब तक दस हजार से अधिक रिपोर्ट/फीचर देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। पत्रकारिता व साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुनील सौरभ को डेढ़ दर्जन से अधिक राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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