स्वयंसेवी संस्था “गूंज” ने आठ सौ परिवारों के बीच बांटे राहत सामग्री

* ग्रामीणों के सहयोग से बनवाया सड़क-पुलिया

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रांची : नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय स्तर की ख्यातिप्राप्त स्वयंसेवी संस्था “गूंज” की ओर से लाॅकडाउन के दौरान पूर्वी सिंहभूम के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे मूलभूत सुविधाओं से वंचित आदिम जनजातीय परिवारों के बीच राहत कार्य चलाया गया। इस संबंध में “गूंज” के झारखंड- ओडिशा राज्य समन्वयक सुरेश कुमार ने बताया कि विगत 27 अप्रैल से 7 मई तक पूर्वी सिंहभूम के पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के छह पंचायतों के 24 गांव के लगभग 800 अत्यंत गरीब आदिम जनजाति परिवारों के बीच खाद्यान्न व अन्य उपयोगी सामानों का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि उक्त प्रखंड के जनजातीय बहुल गांव में अधिकतर लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं।

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

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कोरोना से बचाव के मद्देनजर देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान इन गरीबों की परेशानियां काफी बढ़ गई है। इसे देखते हुए “गूंज” संस्था और अन्य स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से ग्रामीण अंचल के अत्यंत गरीब परिवारों के बीच राशन व जरूरी सामान बांटे गए। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान समय का सदुपयोग करते हुए, लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए, एक दूसरे से शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए ग्रामीणों के लिए लगभग एक किलोमीटर कच्ची सड़क का निर्माण किया गया और उक्त सड़क पर बांस की पुलिया भी तैयार की गई। सुरेश कुमार ने बताया कि राहत कार्य के दौरान ग्रामीणों को संस्था की ओर से नेचुरल फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीणों के बीच विभिन्न पेड़- पौधों, फल-सब्जियों व फसलों के बीज का भी वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की अवधि तक “गूंज” की सहयोगी अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से अत्यंत गरीब इलाके में राहत कार्य चलाने का कार्य जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि “गूंज” के संस्थापक निदेशक और देश के नामचीन समाजसेवी व रैमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित अंशुल गुप्ता के निर्देशन में पीड़ित मानवता की सेवा हेतु संस्था समर्पित है।

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