उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग

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-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

उत्तर कोरिया एक ऊंची दीवारों से घिरा ऐसा देश है जिसके अंदर बाहरी दुनिया का प्रवेश नामुमकिन है। वहां से की भी सूचना तबतक बाहर नहीं आ सकती जबतक सत्ता का आदेश न हो। यही कारण है कि वहां के सनकी तानाशाह किम जोंग के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर तो आ रही है लेकिन सच्ची क्या है पता नहीं चल पा रहा है। उनके स्वास्थ्य को लेकर सिर्फ अटकलों का बाजार गर्म है लेकिन सच क्या है, कोई नहीं जानता। कोई उन्हें ब्रेन डेड बता रहा है तो कोई उनकी मौत की आशंका व्यक्त कर रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि उनका कार्डियोवेस्कुलर ऑपरेशन हुआ है जिसके बाद उनकी हालत खराब हो गई है। दक्षिण कोरिया का मीडिया भी कह रहा है कि किम जोंग का ऑपरेशन हुआ है लेकिन उनकी हालत के बारे में ठोस रूप से कुछ कहने से बच रहा है। उसे गंभीर जरूर बता रहा है लेकिन ब्रेन डेड होने या मृत्यु के संबंध में कुछ नहीं कहता। लोग कुछ कहने से इसलिए भी बच रहे हैं कि किम जोंग के पिता किम जोंग इन भी एक बार दो महीने तक लापता रहे थे। उस समय उनकी औत की टकलें लगी जाने लगी थीं लेकिन वे अचानक प्रकट हो गए थे।

उत्तर कोरिया एक पूरी तरह बंद देश है। पूरी विश्व विरादरी से अलग-थलग रहने वाला देश। वहां के शासक संयुक्त राष्ट्र संघ के तमाम नियमों को ताक पर रखकर परमाणु परीक्षण करते रहते हैं। अमेरिका जैसे ताकतवर देश को धमकी देने में भी नहीं सोचते। किम जोग के पिता ने भी परीक्षण किए थे और इन्होंने भी किए हैं। मिसाइल दागना तो उनके लिए बच्चों का खेल रहा है। वहां से उतनी ही सूचनाएं सामने आती हैं जितना वहां का शासक चाहता है। न उससे कम न उससे ज्यादा। वास्तविकता चाहे जो हो लेकिन अब दुनिया इस बात का आकलन कर रही है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। किम जोंग की उम्र अभी मात्र 35 वर्ष की है। उनके तीन बच्चे हैं जो छोटे हैं। उसकी बहन यो जोंग उत्तर कोरिया में किम जोंग की सबसे विश्वसनीय रही है। वह नरमी से बात करना भी जानती है और धमकी देना भी। सत्ता में किम जोंग के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर है। 11 अप्रैल को उसे उत्तर कोरिया की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया और उसी दिन से किम जोंग लापता हैं। लोगों का मानना है कि किम जोंग के साथ कुछ अनहोनी होने पर उनके 10 वर्षीय बेटे के बड़े होने तक यो जोंग ही सत्ता का संचालन करेगी। वह राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही है और किम जोंग की कार्यशैली को जानती है। फिलहाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया आदि तमाम देश इस मामले में कुछ भी स्पष्ट तौर पर बोलने से बच रहे हैं। उत्तर कोरिया का मीडिया इस संबंध में मौन है। जबतक सत्ता की ओर से उसे निर्देश नहीं मिलेगा वह कोई सूचना नहीं दे सकता। बंद दरवाजे के इस रहस्यमय देश में पूरी आबादी तानाशाह राजवंश के आतंक के साये में जीती है। उत्तर कोरिया का कैलेंडर राझवंश के संस्थापक किम उल संग के जन्म के साथ शुरू होता है। अभी उसमें 114 वां वर्ष चल रहा है। लोगों को अपने शासक की भगवान की तरह पूजा करनी होती है। जिस किसी ने सम्मान देने में जरा भी कमी की उसकी मौत निश्चित हो जाती है। किम जोंग की क्रूरता के किस्से पूरी दुनिया में प्रचलित रहे हैं।

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया चीन और जापान के बीच में स्थित हैं । इसका क्षेत्रफल 120538 वर्ग किलोमीटर और आबादी 25778816 है। स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में यह 1948 ईं में कोरिया के विभाजन के बाद आया। लेकिन इसकी पृष्ठभूमि दूसरे विश्वयुद्ध के समय ही बन गई थी। विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया सोवियत रूस और अमेरिका के बीच दो ध्रुवों में विभाजित हो गई थी। सोवियत रूस और अमेरिका के बीच शीतयुद्ध की शुरुआत हो चुकी थी। कोरिया के उत्तरी हिस्से पर सोवियत रूस का प्रभाव था और दक्षिणी हिस्से पर अमेरिका का। उत्तरी हिस्सा कम्युनिस्ट है तो दक्षिणी हिस्सा पूंजीवादी लोकतंत्र में आस्था रखता है। कोरिया के विभाजन के बाद उत्तरी कोरिया की कमान 36 वर्षीय किम उल संग के हाथ में आई। वे कम्युनिस्ट खेमे के चर्चित नेता थे। चीन और रूस के नेतृत्व में गुरिल्ला युद्ध लड़ चुके थे। उन्होंने उत्तरी कोरिया में एक वंशवादी तानाशाही की बुनियाद रखी। उनके राजवंश में हर पीढ़ी के शासक के नाम के साथ किम लगा होना जरूरी था। उनके बाद किम जोंग इल शासक बने। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही किम जोंग उल को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। 2011 में किम जोंग इल की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उनके देहांत की खबर भी दो दिन बाद दुनिया तक पहुंची थी। उस समय उनके उत्तराधिकारी किम जोंग उल 27 वर्ष के थे।

कहते हैं कि किम जोंग ने सत्ता संभालने के प्रथम तीन वर्षों में 340 लोगों को मौत की सजा दी थी। उनमें कुछ लोगों का कसूर यह था कि उन्होंने किम जोग के भाषण के दौरान ठीक से ताली नहीं बजाई। कुछ लोगों का कुसूर यह था कि भाषण के दौरान उन्हें झपकी आ गई थी। किम ने अपने कई परिजनों को भी मौत के घाट उतारा है। किम जोंग का सौतेला भाई किम जोंग लाम घुमक्कड़ प्रवृत्ति का संगीत प्रेमी था। वह पारिवारिक परंपराओं की परवाह नहीं करता था। किम जोंग के पिता भी उससे नाराज रहते थे और किम जोंग भी। वर्ष 2017 में बहुत ही रहस्यमय तरीके से उनकी हत्या हो गई थी। मलेशिया एयरपोर्ट पर उनकी लाश मिली थी। एयरपोर्ट के सीसीटीवी से पता चला कि दो लोगों ने नर्व एजेंट नामक खतरनाक केमिकल के जरिए उन्हें मौत के घाट उतारा था। वे दोनों किम जोंग के भेजे हुए कीलर थे। किम जोंग की मां जापानी थी। किम जोंग के दादा और किम राजवंश के संस्थापक जापानी होने के कारण उनकी मां के प्रति उपेक्षात्मक भाव रखते थे। किम जोंग के मन में यह बात बचपन से ही बैठ गई थी कि उसके चाचा जोंग सोंग थायक मां और दादा के बीच दरार पैदा करते रहे हैं। इस धारणा के कारण किम जोंग ने 2014 में अपने चाचा पर देशद्रोह का आरोप लगाकर मशीनगन से भून दिया था और उनकी लाश भूखे कुत्तों के आगे फेंक दिया था। किम जोंग के पास युवाओं की एक बहुत बड़ी समर्पित फौज है जो विश्व में इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटरों में चोरी से प्रवेश कर उसमें उपलब्ध जानकारियों को चुरा लेने में पारंगत हैं। इस फ़ौज को नाम दिया गया है सीक्रेट यूनिट 121।

किम जोंग को शुरू से ही तानाशाही की शिक्षा दी गई थी। कहते हैं कि मात्र 7 साल की उम्र में उन्होंने कार चलाना शुरू कर दिया था और 10 वर्ष की उम्र से पिस्टल लेकर घूमना शुरू कर दिया था। उनके आठवें जन्मदिन पर उन्हें सेना के जनरल की वर्दी पहनाई गई और असली जनरलों ने उनके सामने सिर झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया था। किम जोंग की पढ़ाई लिखाई स्वीटजरलैंड में हुई थी जहां फर्जी नाम से उनका दखिला कराया गया था और कोई भी उनका असली परिचय नहीं जानता था। लर्ष 2010 में किम जोंग उल को दुनिया के सामने लाया गया था।

यह राजवंश जनता की परवाह नहीं करता। 1994 से 1998 के बीच वहां भीषण अकाल पड़ा था जिसमें करीब 30 लाख लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग इन अपनी दुनिया में मस्त रहे थे। अभी भी उत्तरी कोरिया की आम जनता गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी झेलती है और तानाशाही सत्ता परमाणु परीक्षण में लगे रहते हैं। कहने को वहां हर पांच साल पर वहां चुनाव भी होते हैं लेकिन प्रत्याशी इकलौता होता है।

अब किम जोंग के संबंध जानने को पूरी दुनिया बेचैन है लेकिन यदि उनकी मौत हो भी जाती है तो इसकी पुष्टि उत्तराधिकारी के सत्तासीन होने के बाद ही हो सकती है। कोई ठीक नहीं कि वे अचानक अस्पताल के बेड से उतरकर दुनिया को चौंका डालें। उत्तर कोरिया में कुछ ही संभव है।

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