आतंकवाद का पोषण छोड़े तो ग्रे लिस्ट से निकले पाकिस्तान

0 110

-देवेंद्र गौतम

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पुस्तकः विश्व की प्राचीनतम सभ्यता लेखकः पं. अनूप कुमार वाजपेयी,कई पुरस्कारों से पुरस्कृत समीक्षा प्रकाशन, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मूल्य-2000 रुपये लेखक ने राजमहल पहाड़ियों और चट्टानों पर संसार के प्राचीनतम आदिमानव के पदचिन्ह ढूंढ निकाले। पता-वाजपेयी निलयम, नया पारा, दुमका झारखंड

पाकिस्तान आर्थिक संकट की दलदल से निकलने की जगह और गहरे धंसता जा रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी वह इसबार भी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाया। जून 2018 से ही वह इस सूची में बना हुआ है। इस लिस्ट में आतंकी संगठनों की वित्तीय मदद पहुंचाने वाले देशों को रखा जाता है। उन्हें इस तरह की गतिविधियां बंद करने और आतंकियों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए चेतावनी देते हुए कुछ वक्त दिया जाता है। जब तक वे ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें ग्रे सूची में रखा जाता है। पाकिस्तान अभी तक उसके मानदंडों पर खरा नहीं उतर पाया।

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने वाले देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ता है। उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना मुश्किल हो जाता है। अन्य देशों से भी आर्थिक मदद मिलना बंद हो जाता है। यह लिस्ट आर्थिक अस्थिरता का परिचायक है। कोई भी देश आर्थिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करना नहीं चाहता है। लिहाजा निवेश की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।

दरअसल आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का हिस्सा बन चुका है। आतंकवादी उसकी सेना की बी टीम का दर्जा रखते हैं। वहां की चुनी हुई सरकार भी अपनी सेना और गुप्तचर संस्था आइएसआई की मर्जी के खिलाफ नहीं जा सकती। अपने पालतू आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। कार्रवाई का दिखावा भी  सही ढंग से नहीं कर पाती। इसीलिए उसकी कोशिश ग्रे लिस्ट से निकलने की जगह ब्लैक लिस्ट में शामिल होने से बचने की रही है। चीन उसका शुभचिंतक जरूर है लेकिन इस मामले में वह खुलकर उसकी मदद नहीं कर पाता। इस्लामी देशों का नेता बनने के चक्कर में तुर्की उसके बचाव में लगा तो इसबार वह भी ग्रे लिस्ट में शामिल हो गया। इस लिस्ट में आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में लापरवाही बरतने वाले देशों को शामिल किया जाता है। आतंकवाद का पोषण पाकिस्तान को बहुत महंगा पड़ रहा है लेकिन वह इससे कोई सबक नहीं ले रहा है। यही कारण है कि एक बार फिर उसे वैश्विक संस्था से झटका लगा है। एफएटीएफ ने उसके साथ तुर्की को भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कमियों के लिए ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया है। तुर्की के अलावा, जॉर्डन और माली को भी ग्रे सूची में जोड़ा गया है, जबकि बोत्सवाना और मॉरीशस को इस सूची से हटा दिया गया है।

एफएटीएफ का फैसला ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान और तुर्की पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान की हालत तो जगजाहिर है। तुर्की की मुद्रा में भी गिरावट दर्ज की गई है और मुद्रास्फीति लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पाकिस्तान पूरी तरह कंगाली के मुहाने पर खड़ा है। उसे कोई कर्ज देने को भी तैयार नहीं हो रहा है। तुर्की एफएटीएफ की बैठकों में पाकिस्तान का जोरदार समर्थन करता रहा है ताकि उसे काली सूची में डाले जाने से रोका जा सके।

एफएटीएफ ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय पूर्ण बैठक बुलाई थी। एफएटीएफ के अध्यक्ष डॉ. मार्क्स प्लीयर का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 34 सूत्रीय एजेंडे में से चार को पूरा करने में विफल रही है। पाक ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तब तक ग्रे लिस्ट में रहेगा तब तक कि वह जून 2018 में सहमत कार्य योजना को पूरा नहीं कर लेता।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह रोकने के लिए कुल 34 कार्ययोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी थी, मगर पाकिस्तान अभी तक इसे पूरा नहीं कर पाया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकियों पर कार्रवाई भी शामिल है। मसूद अजहर उनमें से एक है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ एक इंटरनेशनल निगरानी निकाय है, जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखना और कार्रवाई करना है। एफएटीएफ के निर्णय लेने वाले निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है। लिहाजा अगले चार महीने तक अगर पाकिस्तान नहीं सुधरता तो उसे काली सूची में जाने से रोकना कठिन हो जाएगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: